| जनातलं, मनातलं |
मिपा, पुणे कट्टा...अचानक!!! |
धमाल मुलगा |
| जे न देखे रवी... |
जीए |
हेरंब |
| जनातलं, मनातलं |
संवयी |
हेरंब |
| काथ्याकूट |
मित्राच्या मजेशीर गोष्टी |
शितल |
| जनातलं, मनातलं |
लास वेगास! |
पिवळा डांबिस |
| जनातलं, मनातलं |
माणुसकीचा झरा |
शितल |
| जनातलं, मनातलं |
भडकमकरांचे करीअर गायडंस वर्ग .....भाग ३ ... इव्हेंट मॆनेजर व्हा |
भडकमकर मास्तर |
| जे न देखे रवी... |
दंव |
उदय सप्रे |
| जे न देखे रवी... |
मानाचा मुजरा! |
चतुरंग |
| जे न देखे रवी... |
हे क्रांतिकारकांनो! |
अजय जोशी |
| जे न देखे रवी... |
येक सुविचार |
शरुबाबा |
| जे न देखे रवी... |
गिनिपिग |
मिनासो |
| जे न देखे रवी... |
(वाटले बरे किती) |
केशवसुमार |
| जे न देखे रवी... |
(केश्यांतिका... अर्थात् केश्याची शोकांतिका...(एक नवविडंबन)) |
ब्रिटिश टिंग्या |
| जनातलं, मनातलं |
एका उपक्रमाची ओळख |
नीलकांत |
| कौल |
मराठी माणसाचे मन ओळखून दोन-तीन दिवसात केसचा निकाल लावणा-या मुंडे साहेबांनी दूरदर्शन मालिका काढावी. |
अजय जोशी |
| जे न देखे रवी... |
घोडा आणि ओझे |
विसुनाना |
| काथ्याकूट |
त्रुटी.... |
अभिज्ञ |
| जनातलं, मनातलं |
उपकरणे घेताना |
वरदा |
| जनातलं, मनातलं |
सारे प्रवासी गाडीचे |
भोचक |
| जे न देखे रवी... |
गमतीदार ऊखाणे. |
विवेकवि |
| काथ्याकूट |
मला काय आवडले? |
मनापासुन |
| जनातलं, मनातलं |
दुरावा! |
पिवळा डांबिस |
| काथ्याकूट |
मैत्री म्हणजे कांय? |
उदय सप्रे |
| जनातलं, मनातलं |
मेक्सिकन गंबो |
चित्रा |
| जे न देखे रवी... |
(गजल) |
चतुरंग |
| जनातलं, मनातलं |
दडपे पोहे |
सृष्टीलावण्या |
| जनातलं, मनातलं |
संवादाची ऐशी तैशी |
आपला अभिजित |
| जे न देखे रवी... |
(कुजबुज) |
केशवसुमार |
| जे न देखे रवी... |
(भूक ही खरी किती) |
चतुरंग |