कथा
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| अनुदिनी अनुतापे... | दिनेश५७ | 9 | |
| डॉ.विद्याधर ओक | आनंद घारे | 15 | |
| कशी शांतता शून्य शब्दांत येते.... | आपला अभिजित | 7 | |
| अध्यक्षपदाची फिल्डिंग! | दिनेश५७ | 8 | |
| "लाला! मी पास की नापास? " | श्रीकृष्ण सामंत | 14 | |
| औद्योगीक इसापनीती भाग तीन - मुंगळा, माशी आणि माकड | अरुण मनोहर | 5 | |
| पिसी जेसी चा पुढचा भाग | रामदास | 12 | |
| आली गौराई अंगणी.... | धोंडोपंत | 5 | |
| ज्यूलीची श्रद्धा | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| एका गोष्टीची गोष्ट...( नाट्यलेखनतंत्राबद्दल थोडंसं) भाग तिसरा : संघर्ष,लय,संवाद,जॉनर | भडकमकर मास्तर | 35 | |
| पाब्लो नेरूदा - I do not love you... अनुवाद | मनिष | 18 | |
| सहज आठवलं म्हणून... | वेदश्री | 16 | |
| ईश्वर!!! | पिवळा डांबिस | 10 | |
| एका गोष्टीची गोष्ट...( नाट्यलेखनतंत्राबद्दल थोडंसं) ... भाग दुसरा : प्रमुख व्यक्तिरेखा | भडकमकर मास्तर | 3 | |
| औद्योगीक इसापनीती भाग दोन - फिताधारी कुत्री | अरुण मनोहर | 19 | |
| एका गोष्टीची गोष्ट...( नाट्यलेखनतंत्राबद्दल थोडंसं) ... भाग पहिला. प्रिमाईस | भडकमकर मास्तर | 13 | |
| "इलो रे,इलो! कोकणातला पाऊस. | श्रीकृष्ण सामंत | 18 | |
| श्वानशक्तीचा विजय असो! | आपला अभिजित | 4 | |
| तुका म्हणे बरवे जाण...! | विसोबा खेचर | 27 | |
| शिपल्यातुन अलग जसा मोती....... | शितल | 12 |