[घोडा]
💬 प्रतिसाद
(3)
म
माधुरी दिक्षित
Fri, 11/20/2009 - 14:59
नवीन
बोले तो भाई भी कभी अछा ईन्सान था
भाईच मनोगत आवडल
- Log in or register to post comments
अ
अमृतांजन
Fri, 11/20/2009 - 15:19
नवीन
हर एक इन्सान पैदा होते ही एक सरीकाच रैता है; ये दुनिया उस्को स्पोऐल करतीये.
आपको मेरा काव्य आवड्या और मै गहिवर्या.
- Log in or register to post comments
अ
अमृतांजन
Sat, 11/21/2009 - 06:04
नवीन
मैने अपने पंटर-लोगको ये दिखाया की, खुद मादुरी दिक्षीत ने प्रतिसाद दियेला है अपुनके कविताको, तो सब्बीने पार्टी मांगी है. :-)
- Log in or register to post comments