काही बाही
💬 प्रतिसाद
(1)
श
शुचि
Fri, 03/19/2010 - 19:13
नवीन
काळे काकूंनी काळे काकांचे कचेरीच्या कामाचे कोरे करकरीत कागद काळ्या कात्रीने कराकरा कापून काढले की .
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
जितनी दिल की गहराई हो उतना गहरा है प्याला, जितनी मन की मादकता हो उतनी मादक है हाला,
जितनी उर की भावुकता हो उतना सुन्दर साकी है,जितना ही जो रसिक, उसे है उतनी रसमय मधुशाला।।
- Log in or register to post comments