कवितेचा मार ! ! !
💬 प्रतिसाद
(1)
श
शुचि
Fri, 04/02/2010 - 16:43
नवीन
=)) झकास!!!
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हम नहीं वह जो करें ख़ून का दावा तुझपर
बल्कि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जायेंगे
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