शायरी ...
१. तेरे जाने का असर कुछ ऐसा हुआ मुझपे ,
के तुझे धून्डते धून्डते मैने खुदको खो दिया !
और जब खुदको धून्डने निकला, ,
तो हर जगह सिर्फ तेरा चेहरा नजर आया ! !
२. तेरी आखो में खोकर कई ख्वाब देख लीये मैने ,
तेरी सांसो में मिलकर एक जिंदगी जी ली मैने ,
अब ना तेरी आखे है ,
ना तेरी सांसे है, ,
ना कोई ख्वाब है ,,
बस्स एक जिंदगी है…. जो पिछा नही छोडती ! !
३.तेरा ना मिलना तनहाई से क्या कम था ,
के अब जीने से मै घबराऊ ?
तनहा जिंदगी नरक से क्या कम थी ,
के अब मरने से मै घबराऊ ??
💬 प्रतिसाद
(2)
अ
अनुप ढेरे
Mon, 06/23/2014 - 09:05
नवीन
मजा नाही आली.
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व
वेल्लाभट
Tue, 06/24/2014 - 06:24
नवीन
इतर भाषांमधील साहित्यही चालतं का मिपावर?
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