मेहबूब मेरे...
ईद के दिन कही घर से बाहर ना निकलना,
लोग चान्द समझके कही रोजा ना तोड दे,
खफा हो कर खुदा कही...
चान्द जैसे मुखडे बनाना ना छोड दे...
💬 प्रतिसाद
(18)
ज
ज्ञानोबाचे पैजार
Tue, 02/16/2016 - 11:24
नवीन
रक्षा बंधन के दिन गलतीसे घरके बाहर न निकलना
लडकिया भैया भैया कहेके काही राखी न बांध दे
फिर खफा होके खुदासे ये मत कहेना
ए मालिक... प्लिज बता तेरी रज़ा क्या है...
पैजारबुवा
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प
प्राची अश्विनी
Tue, 02/16/2016 - 12:01
नवीन
=))=))
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ज
ज्ञानोबाचे पैजार
Tue, 02/16/2016 - 12:06
नवीन
वो हमे मेहेबुब भले ही ना समझे हम तो उनके आशिक है
अरे वो क्या, उनके बच्चे भी हमे मामा कहेके बुलाते है
एक जमाना ऐसा था की वो आगे और हम उनके पिछे भागते थे
उस जमाने मे हमारे हाथ मे गुलाब के बहोत सारे फुल हुवा करते थे
अब जमाना ऐसा है की हम आगे और वो हमारे पिछे भागते है
फर्क इतना ही हुवा है की उनके हाथ मे गुलाब की जगह बेलन रहेता है
पैजारबुवा
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प
प्राची अश्विनी
Tue, 02/16/2016 - 12:08
नवीन
पैजारबुवा, इर्षाद!=))
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प
पैसा
Tue, 02/16/2016 - 12:14
नवीन
लगे रहो पैजारबुवा!
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प
प्राची अश्विनी
Tue, 02/16/2016 - 12:17
नवीन
वो मेरेकु बोल्या इद के दिन बाहर मत निकलना ,लोग रोजा तोड देन्गे
वो मेरेकु बोल्या इद के दिन बाहर मत निकलना ,लोग रोजा तोड देन्गे
मै उसकु बोल्या, खालीपिली डरता कायकु, हम फेविकॉल से वापिस जोड देन्गे
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ज
ज्ञानोबाचे पैजार
Tue, 02/16/2016 - 12:43
नवीन
मै दुकानदार को बोला एक फेविकॉल देना उनका फोटो सीने पे चीपकाने के लिये
दुकानदार बोला बडा लेना उसके साथ एका रिमुव्हर फ्री मे मिलता है
पहेले वाली का फोटो सीने से हटाने के लिये
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पैजारबुवा,
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प
पैसा
Tue, 02/16/2016 - 13:05
नवीन
सीने में जलन आँख में तूफान सा क्यूं है
दवाखाने जाके आओ, ये तो अॅसिडिटी है
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प
प्राची अश्विनी
Tue, 02/16/2016 - 13:28
नवीन
एक तुफानी लेहर को पै तुम अॅसिडिटी समझ बैठे
ओर वो लोग है , जो इसी लेहर की ग्रॅव्हिटी मे उलझ बैठे
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प
पैसा
Tue, 02/16/2016 - 13:40
नवीन
हर लेहर की अपनी एक कहानी है
आयी लेहर तो कहर कर दो, बहुत आसानी है
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ए
एक एकटा एकटाच
Tue, 02/16/2016 - 20:08
नवीन
एकदम
दणदणीत शायरया आहेत
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च
चांदणे संदीप
Tue, 02/16/2016 - 13:38
नवीन
हे आवडल्या गेले आहे...एवढे बोलून मी....
Sandy
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ह
होबासराव
Tue, 02/16/2016 - 13:12
नवीन
:०))
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ए
एकप्रवासी
Tue, 02/16/2016 - 19:52
नवीन
हुस्न कि क्या तारीफ करू आपकी
ये अल्फाज भी हार गये
जबसे देखा था इस चांद को हमने
उस चांद को देखना भूल गये
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व
विजुभाऊ
Tue, 02/16/2016 - 20:19
नवीन
युं शायरी को ऐसे मत फेको
हळु हळू अपने गळे से उसको ओको.
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अ
अभ्या..
Tue, 02/16/2016 - 20:22
नवीन
अरारारारा , विजूबौ. लैच हो.
पैले थोडा खोको बादमे ओको
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आ
आदूबाळ
Tue, 02/16/2016 - 22:02
नवीन
आज कल पाव जमीं पर नहीं पडते मेरे
हम ने बडा वाला ट्रे जो लिया हय
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च
चांदणे संदीप
Wed, 02/17/2016 - 05:59
नवीन
मस्तच!
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