मन
मन विचाराचे घर
मन कृतीचे आगर
मन अथांग सागर
मन मधुर साखर
मन आभाळीचा रंग
मन आत्मरंगी दंग
मन देहाचा आरसा
मन स्नेहाचा वारसा
मन मायेचे माहेर
मन देवाचा आहेर
मन चंचल चंचल
मन कधी अविचल
मन मोकाट मोकाट
मन कधीचे मुकाट
मन धावे सैरावैरा
मन माळावरला वारा
मन गरीब पामर
मन कधी अनावर
मन वेडेही भासते
मन मनात हासते...
💬 प्रतिसाद
(4)
क
कविता१९७८
गुरुवार, 10/13/2016 - 09:05
नवीन
खुपच छान
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य
यशोधरा
गुरुवार, 10/13/2016 - 09:16
नवीन
मस्त!
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क
कवि मानव
गुरुवार, 10/13/2016 - 09:45
नवीन
छान !!!
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श
शार्दुल_हातोळकर
Fri, 10/21/2016 - 21:11
नवीन
अरे वा ! जबरदस्त....
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