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Whatsapp Romantic Shayari

त — तृप्ति २३, Sat, 12/28/2019 - 11:31
Whatsapp Romantic Shayari
खामोश दिल हमारा सब कुछ सह लेता है…. तेरी याद मे शायद ये दिल युही रोये जाता है…
Whatsapp Romantic Shayari https://www.truptisshayari.com/whatsapp-romantic-shayari

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67458 वाचन

💬 प्रतिसाद (115)
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टर्मीनेटर Tue, 08/31/2021 - 19:20 नवीन
अभी वक्त है कुछ तो लिखो गालिब…. वरना नाम के आगेसे ‘मिर्झा’ हट जाएगा… - टर्मीनेटर
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प
प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे Tue, 08/31/2021 - 19:46 नवीन
मस्त होता. अर्ज है...लकी फारुकी हसरतचा शेर आहे. अपने कानों में पहन ले मेरे दिल की धड़कन मैं तिरे वास्ते लाया हूँ ले झुमका दिल का -दिलीप बिरुटे
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↩ प्रतिसाद: टर्मीनेटर
ट
टर्मीनेटर Tue, 08/31/2021 - 19:58 नवीन
वाह! शेर मे वजन हैं…
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↩ प्रतिसाद: प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे
र
रागो Wed, 09/01/2021 - 11:23 नवीन
दौर काग़ज़ी था- देर तक ख़तों में जज़्बात महफ़ूज़ रहते थे, मशीनी दौर है- ऊँगली से मिटा दी जाती हैं उम्र भर की यादें
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ट
टर्मीनेटर Wed, 09/01/2021 - 11:53 नवीन
वाह!
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↩ प्रतिसाद: रागो
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प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे Fri, 02/10/2023 - 18:30 नवीन
याद करोगे तो याद रहोगे, क्योंकि हमारी भी याददाश्त बहुत कम है. -दिलीप बिरुटे
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कर्नलतपस्वी Sat, 02/11/2023 - 02:32 नवीन
यहाॅ हर मर्ज की दवा है और हर उदासी का सबब किसम किसम के बंदे है कहते है, मिपा ऐसी जगह है जहाॅ मुर्दे भी जींदा होते है -लखनपुरीया बाकी के बादमे.....
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ट
टर्मीनेटर Wed, 02/15/2023 - 20:00 नवीन
मिपा ऐसी जगह है जहाॅ मुर्दे भी जींदा होते है
जिंदगी जिते हैं 'जिंदादिल'... 'मुर्दादिल' क्या खांक जिया करते हैं... (- टर्मीनेटर मिपावाला)
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↩ प्रतिसाद: कर्नलतपस्वी
प
प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे Sun, 02/12/2023 - 04:40 नवीन
मस्तय टीपी धागा. -दिलीप बिरुटे
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ट
टर्मीनेटर Wed, 02/15/2023 - 19:54 नवीन
मैं तो ग़ज़ल सुना के अकेला खड़ा रहा... सब अपने अपने चाहने वालों में खो गए... -कृष्ण बिहारी नूर
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प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे गुरुवार, 02/16/2023 - 05:03 नवीन
और भी आने दो...! -दिलीप बिरुटे
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↩ प्रतिसाद: टर्मीनेटर
त
तुषार काळभोर गुरुवार, 02/16/2023 - 02:48 नवीन
धागा चालू राहायला पाहिजे.. आदरणीय गुलजार: मुझको इतने से काम पे रख लो... जब भी सीने पे झूलता लॉकेट उल्टा हो जाए तो मैं हाथों से सीधा करता रहूँ उसको मुझको इतने से काम पे रख लो... जब भी आवेज़ा उलझे बालों में मुस्कुराके बस इतना सा कह दो आह चुभता है ये अलग कर दो मुझको इतने से काम पे रख लो.... जब ग़रारे में पाँव फँस जाए या दुपट्टा किवाड़ में अटके एक नज़र देख लो तो काफ़ी है मुझको इतने से काम पे रख लो...
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कर्नलतपस्वी गुरुवार, 02/16/2023 - 04:54 नवीन
मेरी आँखों ने वो मंज़र भी देखा है हमदर्दों को ही बेरहम होते देखा है ।। महफ़िलो में जिनको रहम दिल देखा है अंधेरो में उनको ही खंज़र चलाते देखा है ।।
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प
प्रसाद गोडबोले Sat, 02/25/2023 - 12:38 नवीन
आंसु निकल आयें तो खुद पोछ लेना | लोग पोछने आयेंगे तो सौदा करेंगे |
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कर्नलतपस्वी Sat, 02/25/2023 - 14:23 नवीन
मुर्दो के शहरमें,शमशान का पता बतायें कौन? ठंडी,चलती फिरती लाशोंको जगाये कौन? सब अपने अपने गठ्ठर ढो रहे है, मेरे गठ्ठर को हात लगाये कौन? ll एक और.... फाग का महिना है, तपिश बढ रही है गला सुख रहा है,पानी तो पिला दे ए साकी समय नही हुआ,अब भी होरी को चंद दिन बाकी है ll -लखनपुरीया
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