-गणेश स्तवन-
💬 प्रतिसाद
(2)
अ
अभिष्टा
गुरुवार, 02/12/2009 - 06:51
नवीन
पितांबर शुभ्र कसे? बाकी ठीक.
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जे जे मजसाठी उचित, तेचि तू देशील खचित
हे मात्र मी नक्की जाणित, नाही तकरार राघवा
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न
निलीमा दाणी
Fri, 02/13/2009 - 10:43
नवीन
उत्तम शब्द
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