जबराट.... :D
आजचा "कच्चा माल" फारच मोलाचा दिसतोय !!! ;)
(इडंबन प्रेमी)
मदनबाण.....
रोशनी चाँद से होती है, सितारोंसे नही, मोहब्बत दिल से होती है जुल्म से नही.
जबहरा
--प्रभो
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काय संगावे स्वतः विषयी,आहात तुम्ही सूज्ञ !! एका सारखे एकच आम्ही,बाकी सगळे शून्य !!
नंदन
मराठी साहित्यविषयक अनुदिनी