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लेखक: पगला गजोधर | प्रसिद्ध:
चाल: बाझीगर ओ बाझीगर चित्रपट : बाझीगर (सदर चित्रपटात शारूक पूर्वार्धात खून करतो… वैगरे वैगरे , तरी पब्लिक त्याला हिरो मानते … या चित्रपटा नंतरच हिरो व विलेन दोघा मधली रेषा पुसट व्हायला लागली . . चू भू दे घे असो तरी या चित्रपटाचा इथे काही संबंध नाही) वो किसन, झालता थकेला, तू खेल अस्सा केला, कोमात गेले पार्टीतले सगले उपवर. जादूगर तू जादूगर, दाढीवाला तू जादूगर ।।ध्रु ।। ओ ग्रोथ बोलके, मत लिया है, वादा अच्छेदिनोका, किया है, दिल्लीकी बाझी जिता, राजधर्मको भूलाकर ।।ध्रु ।। चुपकेसे आंटीलाके हस्ते, तू मेरे टीवीमें समाया, मेहेन्गाईकि चाय पिलाके, सबको दिवाना बनाया . पब्लिकच्या मते तुझीरे, नजर हि गंगाकिनारी, पण खरी मदार आहे, केजी बेसिनवर सारी जादुगार: धक धक धडक रहा है दिल भारतमाता : बोलो ना क्या कह रहा है ? जादुगार: पास आओ बता दू भारतमाता : ना बाबा डर लग रहा है
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प्रतिक्रिया

काहो... गजोधरवा. कौनो प्राब्लेम-वाल्बेम हुइ गवा का ? इ कौनसी रचना का आविस्कार करत रही तूम ? तोहार को मोदी आसिडीटी का प्राब्लेमवा हुइ गवा है... इ हमार प्रथम निदान रही तोहरी इ रचरना-वचना पढ के | इक बात बताव, मोदी तो अब आवत है, पर जो कांग्रेस बैठन रही तुम्हारी छातीपर १० साल, तब तोहार रचनाकारी को का सॉंप सुंघ गया था ? तोहार पागपलन पर एक जालिम नुस्का देता रहा हुं... मोदी-मोदी नाम रट, का पता... तोहार पागलपन इस नाम से ही ठीक होइ जाई ! तोहार हितचिंतक {मदन बिहारी} ;)

एक नंबर प्रतिसाद्.....तुमच्या स्वाक्षरी वरुन तरी या आम्लपित्त झालेल्यानी काहि बोध घ्यावा हि माफक अपेक्षा.