कथा
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| सॄष्टीची युक्ती | मीनल गद्रे. | 9 | |
| प्राजक्त.. | प्राजु | 13 | |
| रौशनी.. ५ | विसोबा खेचर | 91 | |
| धन्यवाद.. | प्राजु | 3 | |
| पिंक स्लिप | सुनील | 9 | |
| शाकंभरी पौर्णिमा = मंगळवार २२ जानेवारी २००८ | धोंडोपंत | 4 | |
| प्रिय प्राजुस.... | स्वाती राजेश | 11 | |
| प्रेम | raje1981 | 4 | |
| तुम्ही काय कराल....? | स्वाती राजेश | 23 | |
| गावची वारी | सुनील | 19 | |
| वेगवेगळ्या क्षेत्रातील पुरुषांच्या बायका | छत्रपति | 6 | |
| वाटा | रचनाद्लाल | 4 | |
| एक लोभसवाणा, देखणा ब्लॉग! | विसोबा खेचर | 27 | |
| असच वाटल॑ म्हणून... | छत्रपति | 2 | |
| या सुन्दर जगात | विवेक विद्वास | 5 | |
| अफलातून! | चतुरंग | 7 | |
| संक्रांतीच्या.. | प्राजु | 7 | |
| माझ्याकडेही कार आहे? | देवदत्त | 36 | |
| मकरसंक्रमण! | चतुरंग | 2 | |
| पुरंदर आणि मी | झकासराव | 4 |