शायरे आज़म
दिलावर फ़िगार ह्या उर्दू हास्य कवीची ही 'शायरे आज़म' कविता मराठीतील काही अरभाट किंवा चिल्लर कवींनाही लागू व्हावी. वाचा आणि आनंद घ्या. कुठे काही अडखळले तर जरूर विचारा..
शायरे आज़म
कल इक अदीबो-शायर व नाक़िद मिले हमें
कहने लगे की आओ ज़रा बहस ही करें
करने लगे बहस की अब हिंदो-पाक में
वो कौन है के शायरे-आज़म जिसे कहें
मैंने कहा 'जिगर'! तो कहा डेड हो चुके!
मैंने कहा के 'जोश'! कहा, क़द्र खो चुके
मैंने कहा 'फ़िराक़' की अज़मत का तबसरा!
बोले 'फ़िराक़' शायरे-आज़म!
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