Skip to main content
Skip to main content
✍ मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ
प्रवेश करा | सदस्य व्हा
मिसळपाव
मिसळपाव मराठी साहित्य

Main navigation

  • मुख्य पान
  • नवे लेखन
  • कथा
  • कविता
  • चर्चा
  • पाककृती
  • पर्यटन
  • ललितकला
  • नवे प्रतिसाद

मिपाकरलक्षणे

स — सस्नेह, Mon, 12/23/2013 - 12:23
| जय जय रघुवीर समर्थ | समर्थांसी मनोभावे प्रार्थुनी, मिपाकरांची काही येक लक्षणे डोळियांस दिसली ती श्रोतींयांस विनयपूर्वक सादर . || श्रीमिसळपाव || | मिपाकरलक्षणनाम समास प्रथम | ओम नमोजी संस्थळचालका | नीलकांता मिपामालका | कृपादृष्टीं सदस्यलोका | अवलोकिजे |१| तुज नमू रेवतीतै | अक्षयकान्ते आणि पैसातै | धागीं ठेवी कृपाहस्ते | लेखकुंच्या |२| वंदुनिया सल्लागारचरण | करूनिया संपादकस्मरण | परिक्षणार्थ मिपकरलक्षण | बोलिजेल |३| येक वोरीजिनल एक डूआयडी | उभयलक्षणे सरळ-कानडी | येकयेका घालुन सांगडी | शब्द मांडिले |४| डूआयडीचे लक्षण | पुढिले समासी वर्णन | सावधपणे वाचकजन | परिसोत पुढे |५| आता प्रस्तुत वोरीजिनल | लक्षणे ती तुंदिल | परी काही येक अचळ | होऊन ऐका | ६| जे मिपाकर जन | जयांस जगीं सर्व ज्ञान | जे केवळ आश्रयस्थान | मऱ्हाटीचे |७| संस्थळी सत्वर संचारी | स्वामी-संपादकीं स्तुती करी | कंपू जमवितो अंतुरी | तो येक मिपाकर |८| सांडून सर्वही ज्येष्ठ | नव-आयडीस मानी श्रेष्ठ | सांगे दुज्या संस्थळीची गोष्ट | तो येक मिपाकर |९| समस्त धागे प्रेमें धरी | सदस्यहृदयी वास करी | वक्रोक्तीविण प्रतिसाद करी | तो येक मिपाकर |१०| संपादकांवरी अहंता | अंतरी धरी आढ्यता | अकलेविण दावी विद्वत्ता | तो येक मिपाकर |११| आपुलेच धागे प्रतिसादवी | दुजांचे बाजार उठवी | पॉपकॉर्नचे ढीग दावी | तो येक मिपाकर |१२| विनाकारण वाद करी | प्रतिसादांचे पुच्छ धरी | बहुतांसी टीका करी | तो येक मिपाकर |१३| कंपू धरुनिया हाती | नवागतांस पाडी भ्रांती | धाग्यांच्या वळतो वाती | तो येक मिपाकर |१४| बहु विचक्षण इये जन | तयांमध्ये दावी शहाणपण | परसंस्थळीचे उच्छिष्ट सेवन | करी तो येक मिपाकर |१५| मान अथवा अपमान | लागे ज्यास समान | संपादनाचे ना अनमान | तो येक मिपाकर |१६| धरून प्रतिसादांची आस | धागे पाडी भसाभस | ‘शतकीं’ धरी मनी आस | तो येक मिपाकर |१७| क्रमश :

प्रतिक्रिया द्या
25169 वाचन

💬 प्रतिसाद (73)
ल
लीलाधर Tue, 12/24/2013 - 06:09 नवीन
काय पण जमलय येक नंबर बघ
  • Log in or register to post comments
अ
अत्रुप्त आत्मा Tue, 12/24/2013 - 06:22 नवीन
चतुर चाणक्य नामधारी,च.चा. हे शॉर्टनेम करी नंतर दुसय्रा नामे अवतरी,तो येक लीला धरं! =))
  • Log in or register to post comments
↩ प्रतिसाद: लीलाधर
प
प्रचेतस Tue, 12/24/2013 - 06:33 नवीन
नंतर दुसय्रा नामे अवतरी,तो येक लीला धरं!
येथे फक्त नंतर दुसय्रा नामे अवतरी,तो येक साय लीला धरं! अशी दुरुस्ती करू इच्छितो. =))
  • Log in or register to post comments
↩ प्रतिसाद: अत्रुप्त आत्मा
अ
अत्रुप्त आत्मा Tue, 12/24/2013 - 06:47 नवीन
=))
  • Log in or register to post comments
↩ प्रतिसाद: प्रचेतस
न
नीलकांत Tue, 12/24/2013 - 07:01 नवीन
मस्त लिहीलंय.... मस्तंच :)
  • Log in or register to post comments
प
पिंगू Tue, 12/24/2013 - 08:14 नवीन
काव्यपंडिते.. शतशः लोटांगण.. ___/\___ मिपाबोध लिखाणासाठी पुलेशु..
  • Log in or register to post comments
ग
गणपा Tue, 12/24/2013 - 08:40 नवीन
उत्तम निरिक्षण स्नेहांकिता. फक्कड जमलय.
  • Log in or register to post comments
म
मदनबाण Tue, 12/24/2013 - 09:31 नवीन
मस्तच !
  • Log in or register to post comments
प
प्यारे१ Tue, 12/24/2013 - 10:37 नवीन
मूळ नि पुरवण्या.... सगळी माझीच लक्षणं दिसत आहेत. तिकडे दासबोधात मूर्ख लक्षण दशक नि इकडे मिपाकरलक्षण, तंतोतंत. स्वगतः प्यार्‍या, सुधर लेका. आपल्या मित्रांचं किती लक्ष नि प्रेम आहे ते तरी बघ !
  • Log in or register to post comments
प
पैसा Tue, 12/24/2013 - 11:07 नवीन
काय मी मी लावलंय! दुसर्‍यांच्या "मी"ला जराशी तरी जागा ठेवा जरा!
  • Log in or register to post comments
↩ प्रतिसाद: प्यारे१
अ
अभ्या.. Tue, 12/24/2013 - 22:41 नवीन
मी फ़ुल्टॉस देतो तू सिक्सर हाण असे फिक्सिंग करि ते पण मिपाकर ।। :-D . . (वल्ली मला वाचव :) )
  • Log in or register to post comments
↩ प्रतिसाद: पैसा
ब
बॅटमॅन Tue, 12/24/2013 - 22:50 नवीन
अगागागागागा =))
  • Log in or register to post comments
↩ प्रतिसाद: अभ्या..
म
मितभाषी Tue, 12/24/2013 - 10:56 नवीन
:)
  • Log in or register to post comments
च
चाणक्य Wed, 12/25/2013 - 02:15 नवीन
स्नेहांकिता = खुसखुशीत लिखाण :-) येउद्यात अजून
  • Log in or register to post comments
क
कवितानागेश Wed, 12/25/2013 - 12:33 नवीन
हीहीही!
  • Log in or register to post comments
र
रेवती Wed, 12/25/2013 - 21:44 नवीन
धन्य हो स्नेहंकिताताई!
  • Log in or register to post comments
प
प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे गुरुवार, 12/26/2013 - 05:20 नवीन
और भी आने दो :) -दिलीप बिरुटे
  • Log in or register to post comments
प
प्रीत-मोहर Fri, 01/03/2014 - 05:04 नवीन
मस्तच गो स्नेहा!! बाकी सगळ्यांच्या प्रतिभा पण उफाळु लागल्ये म्हनायची!!!
  • Log in or register to post comments
व
वेल्लाभट Fri, 01/03/2014 - 06:12 नवीन
कसलं जमलंय तुम्हाला !!!!!!!!!
  • Log in or register to post comments
अ
अनन्त अवधुत Mon, 01/19/2015 - 23:16 नवीन
मस्तच लिहिलय
  • Log in or register to post comments
म
मुक्त विहारि Tue, 01/20/2015 - 00:45 नवीन
हा धागा परत एकदा वरती काढल्याबद्दल....
  • Log in or register to post comments
↩ प्रतिसाद: अनन्त अवधुत
च
चुकलामाकला Tue, 01/20/2015 - 03:46 नवीन
झक्कास!
  • Log in or register to post comments
क
कॅप्टन जॅक स्पॅरो Tue, 01/20/2015 - 04:04 नवीन
काव्यांकितातै!!! _/\_ =))
  • Log in or register to post comments
  • «
  • ‹
  • 1
  • 2
मिसळपाव.कॉम बद्दल
  • 1आम्ही कोण?
  • 2Disclaimer
  • 3Privacy Policy
नवीन सदस्यांकरीता
  • 1सदस्य व्हा
  • 2नेहमीचे प्रश्न व उत्तरे
लेखकांसाठी
  • 1लेखकांसाठी मार्गदर्शन उपलब्ध
  • 2लेखन मार्गदर्शन
संपर्क
  • 1सर्व मराठीप्रेमींचे मनापासून स्वागत!
  • 2अभिप्राय द्या
  • 3संपर्क साधा
© 2026 Misalpav.com  ·  Disclaimer  ·  Privacy Policy मराठी साहित्य व संस्कृतीसाठी  ·  प्रवेश  |  सदस्य व्हा