| विषय | प्रतिसादक | लेख | दिनांक Sort ascending |
|---|---|---|---|
| इराण हा काही अतिरेकी देश नाही | विजुभाऊ | [nid] | |
| तात्याला नोबेलची फिकीर नाही. | पाषाणभेद | [nid] | |
| खामेनी मेल्याचे दुःख नाही, पण | अमरेंद्र बाहुबली | [nid] | |
| +१ | अमरेंद्र बाहुबली | [nid] | |
| राहूल गांधीच्या आज्जी ने | विजुभाऊ | [nid] | |
| वास्तविक पाहता भारत एक तटस्थ | पाषाणभेद | [nid] | |
| भारतात परराष्ट्रीय धोरणे | आग्या१९९० | [nid] | |
| खरे आहे | माईसाहेब कुरसूंदीकर | [nid] | |
| १. अमेरिकेने इराणवर हल्ला | कंजूस | [nid] | |
| अॅडम स्मिथ | चंद्रसूर्यकुमार | [nid] | |
| महत्त्वाचे | निनाद | [nid] | |
| विश्वगुरु व्हायचं तर.... | प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे | [nid] | |
| इराणचा शिया अवतार व आजची परिस्थिती | गामा पैलवान | [nid] | |
| खरं आहे. | अमरेंद्र बाहुबली | [nid] | |
| पण खोमनी गेला हे खूप चांगलंच | Bhakti | [nid] | |
| इराण ह्या देशाचे एक कळत नाही, | अमरेंद्र बाहुबली | [nid] | |
| आणि तेलाचे साठे असलेल्या | रामचंद्र | [nid] | |
| मस्तच | चंद्रसूर्यकुमार | [nid] | |
| अमेरिकेतील तेल साठे आटू लागले | कंजूस | [nid] | |
| तातडीची | माईसाहेब कुरसूंदीकर | [nid] | |
| ह्या | माईसाहेब कुरसूंदीकर | [nid] | |
| सोन्याच्या किमती पुन्हा उसळी | कांदा लिंबू | [nid] | |
| युद्धः | मदनबाण | [nid] | |
| हे मी त्या दिवशीच्या | कंजूस | [nid] | |
| इराणने शेजारी देशांवर हल्ला | तिता | [nid] |