कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| आता फक्त काढ दिवस | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| आता फक्त काढ दिवस | श्रीकृष्ण सामंत | 2 | |
| लिव अंधभक्ता लिव | अमरेंद्र बाहुबली | 0 | |
| लिव अंधभक्ता लिव | अमरेंद्र बाहुबली | 2 | |
| तरी हरकत नाही | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| तरी हरकत नाही | श्रीकृष्ण सामंत | 9 | |
| अरे संस्कार संस्कार | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| अरे संस्कार संस्कार | श्रीकृष्ण सामंत | 1 | |
| पेय निघून गेले (विडंबन) | कांदा लिंबू | 0 | |
| पेय निघून गेले (विडंबन) | कांदा लिंबू | 2 | |
| मानवंदना, अनामिक कच्च्यापक्क्या भारतीय गुप्तच'वी'रास | माहितगार | 0 | |
| मानवंदना, अनामिक कच्च्यापक्क्या भारतीय गुप्तच'वी'रास | माहितगार | 1 | |
| लिव बामणां लिव | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| लिव बामणां लिव | श्रीकृष्ण सामंत | 20 | |
| आई घरात असतां घर,घरासम भासले | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| आई घरात असतां घर,घरासम भासले | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| प्रीतीची परंपरा आचरणात आणू कशी | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| प्रीतीची परंपरा आचरणात आणू कशी | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| लाख म्हणू देत जगाला, ही संगत अटळ आहे | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| लाख म्हणू देत जगाला, ही संगत अटळ आहे | श्रीकृष्ण सामंत | 7 |