कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| पाऊले चालती … विडंबन | OBAMA80 | 0 | |
| पाऊले चालती … विडंबन | OBAMA80 | 0 | |
| त्या तरूतळी | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| त्या तरूतळी | अनन्त्_यात्री | 14 | |
| अनमोल आहे जीवन अपुले मित्रांनो | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| अनमोल आहे जीवन अपुले मित्रांनो | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| (चार दिवस मिळाले असता ) | कर्नलतपस्वी | 0 | |
| (चार दिवस मिळाले असता ) | कर्नलतपस्वी | 13 | |
| काय करावे | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| काय करावे | श्रीकृष्ण सामंत | 5 | |
| सुंदर गीते ही स्मरणात येती | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| सुंदर गीते ही स्मरणात येती | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| चार दिवस मिळाले असतां हसू खेळून निभवावे | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| चार दिवस मिळाले असतां हसू खेळून निभवावे | श्रीकृष्ण सामंत | 0 | |
| अक्षय्य तृतीया | बाजीगर | 10 | |
| अक्षय्य तृतीया | बाजीगर | 0 | |
| रोबोटमय जगाने लावला माणसाचा पुर्नशोध | माहितगार | 0 | |
| रोबोटमय जगाने लावला माणसाचा पुर्नशोध | माहितगार | 5 | |
| एआय रोबोट प्रोफेसर | माहितगार | 0 | |
| एआय रोबोट प्रोफेसर | माहितगार | 4 |