कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| तीन हायकू - | विदेश | 10 | |
| शब्दसावल्या | अज्ञातकुल | 0 | |
| ( ढोस देशीही तू, हर दिवशी तू) | नाना चेंगट | 5 | |
| हर देशीही तू, हर वेशीही तू | नरेंद्र गोळे | 1 | |
| शब्द .. शब्द .. शब्द .. | विदेश | 3 | |
| प्रदेश | पेशवा | 9 | |
| हट्ट! | चैतन्य दीक्षित | 7 | |
| (काऽऽय रेऽऽ देवाऽऽ) | रमताराम | 50 | |
| निशाण | मनीषा | 7 | |
| प्रवाह.... | वेणू | 1 | |
| पत्र | मंदार दिलीप जोशी | 1 | |
| तुझ्या विना | आनंद भातखंडे | 2 | |
| मी आहे!! | मंदार दिलीप जोशी | 1 | |
| मी तसाच पुढे निघालो… | झंम्प्या | 1 | |
| वारूळ | पेशवा | 20 | |
| दवबिंदू..! | वेणू | 11 | |
| मुक्तके | भरत कुलकर्णी | 2 | |
| संजीवक | अज्ञातकुल | 2 | |
| गनीम | निळकंठ दशरथ गोरे | 1 | |
| लपाछपी | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 7 |