कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मनाच्या खोल गाभार्यात | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 5 | |
| कप आणी बशी | अविनाशकुलकर्णी | 11 | |
| हळूच तू मला पाहीलेले | पाषाणभेद | 2 | |
| ...तुझ्या अस्तित्वाची ओळखीची खुण | विकाल | 5 | |
| साखर चौथीचा गणपती | जागु | 23 | |
| मै पिच्चर में जावू के नको | पाषाणभेद | 1 | |
| मजला महाग पडले. | अविनाशकुलकर्णी | 14 | |
| आठवणी | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 8 | |
| आजचा सवाल-'?' | अत्रुप्त आत्मा | 9 | |
| चला वेळ आता आली आहे ...!! | प्रकाश१११ | 4 | |
| दादला हातोडीनं ठोकतो खुट्टा | पाषाणभेद | 1 | |
| पाव्हण्यानं डोळा मारला | पाषाणभेद | 1 | |
| अशी कशी ही म्हागाई | पाषाणभेद | 6 | |
| )माझं सामान हे...( | राजेश घासकडवी | 28 | |
| राधा गौळण | पाषाणभेद | 4 | |
| रंगपंचमीच्या सनाला | पाषाणभेद | 3 | |
| मिसळपाववरील कवितांची रसग्रहणं # माझं हे सारं सामान गं सखू... | शैलेन्द्र | 66 | |
| लावणी: लग्नाचं वय माझं झालं | पाषाणभेद | 5 | |
| अर्घ्य | राजेश घासकडवी | 30 | |
| पाहटंची शेती | पाषाणभेद | 2 |