कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| कृष्णानुराग संकीर्तन | सागरलहरी | 1 | |
| देवा मला परत एकदा लहान व्हायचं आहे... | प्रिया ब | 9 | |
| राधाराणी जरा सावर | क्रान्ति | 4 | |
| देहदशा | अज्ञातकुल | 0 | |
| तू लिहिलेस नि मला सुचून गेले. ..!! | प्रकाश१११ | 10 | |
| विदुषक | अभिजीत राजवाडे | 7 | |
| राखेमधे लोळतो मी (हजल) | गंगाधर मुटे | 7 | |
| रगडा पॅटिस पाणीपुरीवर फरसाणही दिसले - | विदेश | 4 | |
| अहो आण्णा ... | विश्वेश | 12 | |
| रानफुल | आनंदयात्री | 26 | |
| शब्दांचे पारतंत्र्य | निनाव | 4 | |
| २. स्वप्नमेघातील चांदणं | गणेशा | 5 | |
| मी पुरुष बिच्चारा | गणेशा | 15 | |
| ह्या परदेशात.....!! | प्रकाश१११ | 9 | |
| ... | प्रियाली | 150 | |
| धिक्कार हो! | दैत्य | 1 | |
| विचारवंत! | राजेश घासकडवी | 22 | |
| उहापोह | निनाव | 8 | |
| आमचा फाटक्यात अडकला पाय , या अण्णांचं करायचं काय? | सुधीर काळे | 15 | |
| पुरुष! | अभिजीत राजवाडे | 24 |