कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| आमची बी एक | मुक्तसुनीत | 19 | |
| (थंड झाले खाकरे गं) | ३_१४ विक्षिप्त अदिती | 32 | |
| हे गणराज्य की धनराज्य? | गंगाधर मुटे | 1 | |
| पंख मोकळे नभात.. | प्राजु | 13 | |
| अण्णा हजारे | अभिजीत राजवाडे | 3 | |
| "संभवामि युगे युगे" असे वचन देऊन गेलेले भगवान श्रीकृष्ण अण्णांच्या रूपात आले आहेत! | सुधीर काळे | 65 | |
| आरसा | निनाव | 3 | |
| दोर | निनाव | 0 | |
| मिसळपाव | अभिजीत राजवाडे | 4 | |
| बहरणारा ऋतू संपत आलाय ...!! | प्रकाश१११ | 4 | |
| माझी ललाटरेषा | गंगाधर मुटे | 8 | |
| आजी | अभिजीत राजवाडे | 9 | |
| अंतर -२ | निनाव | 1 | |
| तळतेस भजी तू जेव्हां - | विदेश | 17 | |
| आयुष्य-पुष्प | अभिजीत राजवाडे | 3 | |
| (महावीर पांडू) | पॅपिलॉन | 9 | |
| महावीर बंडू - | विदेश | 5 | |
| मुंबैच्या दर्यामंदी जहाज बुडू जातं - | अमोल केळकर | 3 | |
| अंतर | निनाव | 0 | |
| अंधार | अभिजीत राजवाडे | 3 |