कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| थेट चित्रगुप्ताच्या मूळ नोंद वहीतून: द्रौपदीची पाचजणात वाटणी का आणि कशी झाली याची हकीगत आणि श्रीकृष्णाचा धावा | चित्रगुप्त | 29 | |
| दोन कविता | अरूण म्हात्रे | 4 | |
| लाचखोर लोकांनी - | विदेश | 7 | |
| (गाववाले आणि मुंबैकर) | धन्या | 2 | |
| आसूड | चन्द्रशेखर गोखले | 5 | |
| (आली माझ्या घरी ही गटारी ) | अमोल केळकर | 0 | |
| विडंबनकाव्यमाला-भाग-३ | अत्रुप्त आत्मा | 15 | |
| गुरूमंत्र | मूकवाचक | 8 | |
| शिल्लकेला जीव जर का आणखी | धनंजय | 13 | |
| सुख | प्रिया ब | 3 | |
| किती सजवू मी माझं मला | पाषाणभेद | 9 | |
| दोन चारोळ्या - | विदेश | 5 | |
| पिंकी, परी आणि मोर - | विदेश | 3 | |
| स्थलांतर | अरुण मनोहर | 2 | |
| आभासी जग | प्रिया ब | 29 | |
| १३ जुलै २०११ आणि नंतर... | सुशान्त | 1 | |
| शिवार पिकल उद्या ... (समाप्त... रानातील वाट..) | गणेशा | 5 | |
| षंढ सारी लेकरे गं मायभूमी माफ कर.. | प्राजु | 91 | |
| प्रेम | amirohi | 2 | |
| विडंबनकाव्यमाला-भाग-२ | अत्रुप्त आत्मा | 16 |