कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| तुमच्यात्-आमच्यात | विनायक प्रभू | 15 | |
| बदल्ला आहे काळ.. | प्रिया ब | 22 | |
| (पाव्हनं चला, झाडावरती बसू !) | केसुरंगा | 3 | |
| वड बोलला यमाला | क्रान्ति | 49 | |
| साहित्याशी जवळिक साधत - | विदेश | 1 | |
| पाऊस | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 6 | |
| देशभक्ती रचना: तिरंगी आमचा भारतीय झेंडा | पाषाणभेद | 3 | |
| संधिकाल | धनंजय | 7 | |
| पाऊस | सोनल कर्णिक वायकुळ | 4 | |
| गालिब | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 10 | |
| अबोल प्रीत, उमलतेय.. | प्राजु | 29 | |
| सण पाऊस साजरा --- | विदेश | 0 | |
| घेऊ कसा उखाणा (तिकडम) | अरुण मनोहर | 0 | |
| पर्सनल अकाऊंट | अत्रुप्त आत्मा | 6 | |
| जय जय लंबोदरा | पाषाणभेद | 1 | |
| चबुतरा | अरुण मनोहर | 8 | |
| पाऊस | सामान्य वाचक | 10 | |
| हायकू १ | पाषाणभेद | 4 | |
| आल्या पावसाच्या सरी - | विदेश | 1 | |
| (येस , वी आर...) | धन्या | 36 |