कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मेरे मुर्गे को क्या हुवा चाचा? | पाषाणभेद | 7 | |
| लई दिसांची मी खाल्ली नाही शिरापुरी | पाषाणभेद | 3 | |
| दोन छोटे | अरुण मनोहर | 6 | |
| भेळ | अत्रुप्त आत्मा | 5 | |
| डाल ग कोंबडी डाल | पाषाणभेद | 3 | |
| नि:संशय | अज्ञातकुल | 3 | |
| दृष्टीआड | अज्ञातकुल | 3 | |
| नखरा नाही इतका बरा | पाषाणभेद | 9 | |
| "आदर्श " सुंदर हाच आमचा बंगला | विदेश | 2 | |
| आयुष्य पार सरलेले | स्वानंद मारुलकर | 8 | |
| हे 'असं' कसं? | वेणू | 2 | |
| मंत्रमुग्ध तळे | अरुण मनोहर | 3 | |
| वेडेपणा... (गझल) | स्वानंद मारुलकर | 3 | |
| दखल | उपटसुंभ | 5 | |
| सकाळची गोष्ट-(१ प्रासंगिका ) | अत्रुप्त आत्मा | 12 | |
| वसंत काव्य मालेत पुष्प गुंफायला निमंत्रण.... | शशिकांत ओक | 22 | |
| गातेस घरी तू जेव्हां | विदेश | 4 | |
| नसबंदी | राजेश घासकडवी | 16 | |
| थेंबे-थेंबे | अरुण मनोहर | 3 | |
| तुझे भास होते | क्रान्ति | 10 |