कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| नंदीकाळा-मुळ काव्य>(जग हे बंन्दीशाळा) | अत्रुप्त आत्मा | 3 | |
| अनोळखी...(गझल) | स्वानंद मारुलकर | 5 | |
| मैफील आज जमली - | विदेश | 2 | |
| क्रोमियम प्लेटेड ढग | अरुण मनोहर | 6 | |
| त्यांना त्यांच्या मुलाला सचिन तेंडुलकरच करायचय | ज्ञानोबाचे पैजार | 20 | |
| क्षितीजावर ढळला आणि एक सुर्य | पाषाणभेद | 2 | |
| नेमेंचि त्यानंतर पावसाळा | धनंजय | 7 | |
| दूर नाही घरदार , आम्हाला नाही कुणाची भीती ! | विदेश | 1 | |
| नाट्यगीत: अशी कशी ही पिढी नेटावली | पाषाणभेद | 1 | |
| विडंबन-धुंदीशाळा---बघ हा रंगित चाळा. | अत्रुप्त आत्मा | 13 | |
| पु.ल. आणि अत्रे-एक दर्पण | अत्रुप्त आत्मा | 16 | |
| प्रेम आणि मरण | ajay wankhede | 1 | |
| संदर्भ | मिसळलेला काव्यप्रेमी | 3 | |
| ब्रॉयलर कोंबडी सारखे हे शहर ....!! | प्रकाश१११ | 3 | |
| नव्या साडीसाठी - दोघांची भ्रमंती | विदेश | 4 | |
| माणसान्चा देव | अत्रुप्त आत्मा | 15 | |
| लोकल शोध- | अरुण मनोहर | 4 | |
| Two Friends | पाषाणभेद | 6 | |
| (बिल्ली हरवली) | पिवळा डांबिस | 23 | |
| जर तू असता तर | नगरीनिरंजन | 13 |