जे न देखे रवी...

कविता - कविराज

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अक्षरछंद वृत्त- देवद्वार
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(६-६-६-४)
कविराज
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कविता लेखन
असोशी मनास
करिते प्रयास
लेखनाचा    ।।

अभ्यास करावा
करावे वाचन
त्यावरी चिंतन
गरजेचे         ।।

सांगणारे कुणी
सोबत असेल
लेखन वाटेल
सुलभसे         ।।

प्रतिभा प्रतिमा
विश्वची आगळे
असती वेगळे
कविराज        ।।
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कविता -कविराज
-अरुण वि.देशपांडे -पुणे
9850177342
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