कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| विडंबनाच्या चर्चेवर विडंबन... मद्यविरहित | तळीराम | 2 | |
| चेहरा | सुवर्णमयी | 3 | |
| कुणी बाइ गुणगुणले.....रानारानात गेलीबाइ शीळ | मनापासुन | 1 | |
| आयुष्य....."सप्टेंबर २००५" ला लिहिलेली एक कविता | उदय सप्रे | 3 | |
| मन आंब्याचा मोहोर....! | प्राजु | 53 | |
| मोबाइल उचलला | प्रा सुरेश खेडकर | 1 | |
| धुन्दी - विडंबनाचा एक प्रयत्न | चेतन | 8 | |
| उघड "बार" देवा आता , उघड "बार" देवा | उदय सप्रे | 19 | |
| दिवस जुने ते स्मरायचे | केशवसुमार | 7 | |
| मी नाही अभ्यास केला | देवदत्त | 12 | |
| टवाळ्क्या | चेतन | 3 | |
| पुण्यातील एका स्कूटरचे आत्म(घातकी)व्रूत्त्.....(तमा पुणेकरांची "स्थूल्"मानाने क्षमा मागून) | उदय सप्रे | 2 | |
| डोळे हे जुल्मी गडे.....रेखाटन | वर्षा | 18 | |
| (एका माळेचे मणी) | केशवसुमार | 15 | |
| भविश्यातिल रिलायन्स ग्रुप IPO | शरुबाबा | 6 | |
| हिंदू.. | विवेकवि | 1 | |
| भाषा मराठी.. | विवेकवि | 1 | |
| मी.. | विवेकवि | 0 | |
| 'सेने'तिल काटे... | चतुरंग | 6 | |
| जोक | सत्या | 6 |