कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| काटा रुते कुणाला, बोंबील खाती कोणी | ॐकार | 14 | |
| बायको नावाचे वेगळेच प्रकरण आपल्या पुढे येते.... | विजुभाऊ | 4 | |
| कविता सुचे कुणाला ... | केशवसुमार | 16 | |
| 'बाटा' रुते.. | चतुरंग | 22 | |
| बोले हो बॉस कुणाला (विडंबन गीत), काटा रूते कुणाला (मूळ गीत) | प्रा सुरेश खेडकर | 2 | |
| अथांग सागर | सुवर्णमयी | 18 | |
| सळसळणार्या फांद्यांवरती शेंगा फिक्क्ट सोनेरी | ॐकार | 25 | |
| जेव्हा तिची नि माझी ... | केशवसुमार | 27 | |
| (कुणि जाल का, सांगाल का..) | चतुरंग | 18 | |
| ((कुणि जाल का, सांगाल का..)) | केशवसुमार | 22 | |
| चाळ ही हदरून जाते | केशवसुमार | 18 | |
| (वाट) | केशवसुमार | 1 | |
| सुनीतः एक प्रयत्न | ऋषिकेश | 3 | |
| विडंबन - तोच नौरोबा घरात, स्थूल आणि स्वस्थ ही | अविनाश ओगले | 5 | |
| विडंबन - जे खावे पचण्याचे वय निघून गेले | अविनाश ओगले | 24 | |
| अंतर | सचिन | 5 | |
| मी दारु प्याली नाही....... | ब्रिटिश टिंग्या | 5 | |
| विडंबन-गुत्त्याच्या रे उंबरठ्यावर आपण दोघे. | अविनाश ओगले | 4 | |
| या दोन ओळी घ्या... पुढचे शेर लिहा........ | अविनाश ओगले | 7 | |
| सगळ्याना ओपन चॅलेंज........र ला ट न जुळवता चारोळी | विजुभाऊ | 86 |