कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| एक दिवस..... | विवेकवि | 1 | |
| एक मैत्रिण | विवेकवि | 4 | |
| प्रेम | विवेकवि | 3 | |
| पथ्य | केशवसुमार | 9 | |
| ...का? | चतुरंग | 1 | |
| एक नेपाळी गीत... | मनस्वी | 13 | |
| घशाशी | केशवसुमार | 12 | |
| खर्डेघाशी | बेसनलाडू | 11 | |
| तोंड लोकांचे | ऋषिकेश | 11 | |
| माकडाची जात याची, मूढ कुठला केशवा | केशवसुमार | 9 | |
| श्रद्धांजली! | अशोक गोडबोले | 2 | |
| शब्देविण संवादिजे... | अशोक गोडबोले | 5 | |
| मानिनीस (पूर्ण कविता आठवतेय का?) | लिखाळ | 0 | |
| हृदयाच्या अंतर्हृदयाला.... | सृष्टीलावण्या | 2 | |
| शीर्षक सुचत नाही - २ | बेसनलाडू | 5 | |
| (शीर्षक सुचत नाही) | केशवसुमार | 5 | |
| लिलीची फुले | सृष्टीलावण्या | 2 | |
| ही नेहमीचीच हो माझी रामकहाणी... | केशवसुमार | 4 | |
| झोप २ | बुध्दू बैल | 1 | |
| सोनेरी उन्हात भिरभिरणारे भ्रमर... | सृष्टीलावण्या | 4 |