कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| किनारा.. | पेशवे बाजीराव तिसरे | 8 | |
| असंही प्रेम असतं!! | तुमचा आनंद | 5 | |
| सुखाच्या शोधात.... (दु:ख)!!! | छत्रपति | 5 | |
| हे स्वप्ना तु स्वप्नात माझ्या येऊ नको......... | छत्रपति | 0 | |
| मी शब्द ओठि रोखले... | छत्रपति | 4 | |
| आई, तुला एकदाच हाक दिली तरी अब्जांनी धावून येशील | सनिल पांगे | 5 | |
| धागा धागा जोडित्..(धागा-४) | प्राजु | 46 | |
| शिघ्रकविता | बहुरंगी | 8 | |
| आजच्या मुली | छत्रपति | 5 | |
| जाळण्या पूर्वी किंतींदा तुम्हीचं तर जाळलं होतं | सनिल पांगे | 2 | |
| ओळखलं तिने मला जागच्या जागी ती स्तब्द झाली | सनिल पांगे | 3 | |
| पुन्हा गंध आला...(गझल) | बहुरंगी | 5 | |
| अतिशय फालतु विनोद | बहुरंगी | 12 | |
| पुण्याचे ट्रॅफिक...नाम॑जूर | धमाल मुलगा | 22 | |
| सुंदर तलम रेशीम.. (धागा -३) | प्राजु | 51 | |
| रिस्क - तळीराम | चतुरंग | 27 | |
| वीणीचा नवा धागा.... | प्राजु | 69 | |
| आयुष्य तेच आहे | सनिल पांगे | 22 | |
| नवी रेशमी वीण.. | प्राजु | 50 | |
| शब्द! | ऋषिकेश | 11 |