कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मधुशाला | धोंडोपंत | 2 | |
| निवारा... | प्राजु | 9 | |
| शिक्षक दिन | इनोबा म्हणे | 1 | |
| उड्डाण पूल | इनोबा म्हणे | 1 | |
| (कातरवेळी) | केशवसुमार | 3 | |
| तूच नव्याने घडशील काय | ऋषिकेश | 7 | |
| काय सांगू नवलाई | इनोबा म्हणे | 1 | |
| मन... | शब्दवेडा | 4 | |
| (नाठाळ मुलांसाठी) बालकविता | धनंजय | 6 | |
| विरूपिका (२) : भविष्य | ॐकार | 1 | |
| तुझ्या डोळ्यांचा थांग घेताना - कविता | सागर | 19 | |
| पाखरु : भाग १ (कविता) | सागर | 4 | |
| एक दिवा | मनोज | 16 | |
| मला कसा हा म्हणतो मेला.... | केशवसुमार | 8 | |
| विंदा करंदीकरांच्या विरूपिका - (१) २८ जानेवारी १९८० | ॐकार | 5 | |
| हात तुझा हातात...... | अगस्ती | 11 | |
| आपण यांना पाहिलंय का? | ऋषिकेश | 4 | |
| समुद्रपक्षी | स्वाती दिनेश | 7 | |
| चारोळी | सुशील | 11 | |
| एडीपस आणि कूटप्रश्न | धनंजय | 5 |