कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| गीतम् (संस्कृत रचना) | अशोक गोडबोले | 4 | |
| चकाट्या - २ | ॐकार | 5 | |
| मजला बघ प्रीत तुझी कळली | रंजन | 1 | |
| मळमळ | केशवसुमार | 34 | |
| घर | सुवर्णमयी | 19 | |
| मनात माझ्या तुझीच गीते लिहून गेलो... | रंजन | 5 | |
| आताशा मी ग्लास रिकामे मदिरेचे करतो | केशवसुमार | 10 | |
| या तुम नहीं या हम नहीं | पंकज | 2 | |
| प्रार्थना. | अशोक गोडबोले | 8 | |
| एकमेकांसाठी (दुसरी आवृत्ती) | धनंजय | 17 | |
| एक रात्र.. | प्राजु | 21 | |
| चकाट्या | ॐकार | 9 | |
| तरच मग कविता कर... | विसुनाना | 11 | |
| और एक | अप्पासाहेब | 10 | |
| गमभन का?! | टीकाकार-१ | 12 | |
| ही धार पहिलटकरीण ... | अप्पासाहेब | 7 | |
| रेशमाच्या बाबांनी | केशवसुमार | 43 | |
| ती सांज रंगलेली | अशोक गोडबोले | 4 | |
| आयुष्य असेच आहे | रंजन | 3 | |
| खिडकीकडून खिडकीकडे | रंजन | 1 |