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चला अंताक्षरी खेळूया....

म — माम्लेदारचा पन्खा, Sun, 09/13/2015 - 12:29
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे...... मेरे मेहबूब कयामत होगी.... आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी... मे री न ज रे तो गि ला क र ती है.... तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी.... पुढचे अक्षर "ग"....

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110339 वाचन

💬 प्रतिसाद (457)
ए
एक एकटा एकटाच Mon, 09/14/2015 - 03:59 नवीन
यम्मा यम्मा यम्मा यम्मा है खुबसूरत समा बस आज की रात है जिंदगी कल हम कहा तुम कहा
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ह
हेमंत लाटकर Mon, 09/14/2015 - 04:24 नवीन
हम तुम एक कमरे मे बंद हो और चाबी खो जाये
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ए
एक एकटा एकटाच Mon, 09/14/2015 - 04:42 नवीन
ये जो मोहब्बत है ये उनका है काम मेहबूब का जो बस लेते हुए नाम मर जाए मिट जाए हो जाए बदनाम रहेने दो छोडो अब जाने दो यार हम ना करेंगे प्यार.........
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स
सिरुसेरि Mon, 09/14/2015 - 04:45 नवीन
या भवनातील गीत पुराणे , मवाळ हळवे सुर जाउ दया , आज येथुनी दूर . भाव भक्तीची भाऊक गाथा पराभुत हो , नमविल माथा नवे सुर अनं नवे तराणे हवा नवा तो नुर , जाउ दया , आज जुने ते दूर . या भवनातील गीत पुराणे .
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प
प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे Mon, 09/14/2015 - 05:05 नवीन
य वरुन तुमचा माझा प्रतिसाद लिही पर्यन्त दोन प्रतिसाद पडले होते. मराठी अंताक्षरीसाठी इथे http://www.misalpav.com/node/31 प्रतिसाद लिहा. -दिलीप बिरुटे
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↩ प्रतिसाद: सिरुसेरि
प
प्रा.डॉ.दिलीप बिरुटे Mon, 09/14/2015 - 04:54 नवीन
याद तेरी आयगी मुझको बड़ा सतायेगी फिर ये झूटी तेरी मेरी जान लेके जायेगी -दिलीप बिरुटे
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स
सिरुसेरि Mon, 09/14/2015 - 05:26 नवीन
हा हिन्दी , ईंग्लिश गाण्यांच्या अंताक्षरीचा धागा दिसतो आहे . मराठी अंताक्षरीसाठीच्या धाग्याची लिंक दिल्याबद्दल धन्यवाद .
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ब
बोका-ए-आझम Mon, 09/14/2015 - 05:27 नवीन
अपनोंपे सितम ऐ जाने वफा ये जुल्म ना कर रहने दे अभी थोडासा भरम ऐ जाने वफा ये जुल्म ना कर ये जुल्म ना कर! पुढचं अक्षर र
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ज
ज्ञानोबाचे पैजार Mon, 09/14/2015 - 05:35 नवीन
ग़म का फ़साना बन गया अच्छा एक बहाना बन गया अच्छा सरकार ने आके मेरा हाल तो पूछा ग़म का... तुम्हारे ख़यालों में खो जायें ये जी चाहता है की सो जायें देखो बातों-बातों में चाँदनी रातों में ख़्वाब सुहाना बन गया अच्छा... बतायें तुम्हें क्या कहाँ दर्द है यहाँ हाथ रखना यहाँ दर्द है देखो बातों बातों में दो ही मुलाकातों में दिल ये निशाना बन गया अच्छा... मुहब्बत की रंगीन महफ़िल में जगह मिल गई आपके दिल में देखो बातों-बातों में प्यार की बरातों में अपना ठिकाना बन गया अच्छा... पुढील अक्षर - छ पैजारबुवा,
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ज
ज्ञानोबाचे पैजार Mon, 09/14/2015 - 05:40 नवीन
जाउदे हे घ्या रा वरुन रात और दिन दिया जले मेरे मन में फिर भी अंधियारा है जाने कहाँ है वो साथी तू जो मिले जीवन उजियारा है रात और दिन... पुढील अक्षर न
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अ
अविनाश पांढरकर Mon, 09/14/2015 - 05:43 नवीन
छन से जो तुटे कोई सपना जग सुना सुना लागे जग सुना सुना लागे कोई रहे ना जब अपना पुढील अक्षर - न
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ऋ
ऋतुराज चित्रे Mon, 09/14/2015 - 05:53 नवीन
नदिया से दरिया, दरिया से सागर, सागर से गहरा जाम जाम में डूब गयी यारों मेरे जीवन की हर शाम म
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ए
एक एकटा एकटाच Mon, 09/14/2015 - 05:55 नवीन
मेरे सपनों को रानी जब आएगी तू आई रुत मस्तानी कब आएगी तू
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ज
ज्ञानोबाचे पैजार Mon, 09/14/2015 - 06:01 नवीन
तमा तमा लोगे तू प्रेमी आहा मैं प्रेमी आहा तू रानी आहा मैं राजा आहा फिर क्या daddyक्या अम्मा इक बस तू ही प्यार के काबिल सारा जहां है निकम्मा तमा तमा लोगे तमा पुढचे अक्षर "त" पैजारबुवा,
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ए
एक एकटा एकटाच Mon, 09/14/2015 - 06:03 नवीन
तुझे देखा तो ये जाना सनम प्यार होता है दीवाना सनम
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ह
हेमंत लाटकर Mon, 09/14/2015 - 06:06 नवीन
तुम तो ठहरे परदेशी साथ क्या निभावोगे
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न
नीलमोहर Mon, 09/14/2015 - 06:08 नवीन
माही वे, मोहब्बतां सच्चियां वे मंगदा नसीबां कुछ और है..
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म
मारवा Mon, 09/14/2015 - 06:54 नवीन
हैं सबसे मधुर वो गीत जिन्हें, हम दर्द के सुर में गाते हैं जब हद से गुज़र जाती है खुशी, आँसू भी छलकते आते हैं काँटों में खिले हैं फूल हमारे, रंग भरे अरमानों के नादान हैं, जो इन काँटों से दामन को बचाये जाते हैं जब ग़म का अन्धेरा घिर आये, समझो के सवेरा दूर नहीं हर रात का हैं पैगाम यहीं, तारे भी यहीं दोहराते हैं पहलू में पराये दर्द बसाके, तू हँसना हँसाना सीख ज़रा तूफ़ान से कह दे घिर के उठे, हम प्यार के दीप जलाते हैं काहीही हं ह
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न
नीलमोहर Mon, 09/14/2015 - 07:01 नवीन
हम न समझे थे बात इतनीसी ख्वाब शीशे के, दुनिया पत्थर की..
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म
मारवा Mon, 09/14/2015 - 07:03 नवीन
कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है के जैसे तुझ को बनाया गया है मेरे लिए तू अब से पहले सितारों में बस रही थी कही तुझे जमीं पे बुलाया गया है मेरे लिए कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है के ये बदन ये निगाहें, मेरी अमानत हैं ये गेसुओं की घनी छाँव हैं मेरी खातिर ये होंठ और ये बाहें मेरी अमानत हैं कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है के जैसे बजती हैं शहनाईयां सी राहों में सुहाग रात है घूंघट उठा रहा हूँ मैं सीमट रही है, तू शरमा के अपनी बाहों में कभी कभी मेरे दिल में ख़याल आता है के जैसे तू मुझे चाहेगी उम्रभर यूही उठेगी मेरी तरफ प्यार की नजर यूं ही मैं जानता हूँ के तू गैर है मगर यूं ही हा हा हा ह
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म
मारवा Mon, 09/14/2015 - 07:06 नवीन
संपादक महोदय हे डबल डबल का येत माहीत नाही कुठे चुक होते कळत नाही कृपया या विनंती प्रतिसादा सहीत सर्व डबल आलेले प्रतिसाद काढुन टाका याने रसभंग होतो साखळी तुटतेय
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श
शामसुन्दर Mon, 09/14/2015 - 07:19 नवीन
होके मजबूर मुझे उसने भुलाया होगा ज़हर चुपके से दवां जानके खाया होगा दिल ने ऐसे भी कुछ अफ़साने सुनाये होंगे अश्क़ आँखोंने पिये और ना बहाये होंगे बंद कमरे में जो खत मेरे जलाये होंगे एक एक हर्फ़ जबीन पर उभर आया होगा उसने घबराके नज़र लाख बचाई होगी दिल की लूटती हुयी दुनियाँ नज़र आयी होगी मेज़ से जब मेरी तस्वीर हटाई होगी हर तरफ मुझको तडपता हुआ पाया होगा छेड़ की बात पे अरमां मचल आये होंगे ग़म दिखावे की हँसी में उबल आये होंगे नाम पर मेरे जब आँसू निकल आये होंगे सर ना काँधे से सहेली के उठाया होगा जुल्फ़ ज़िद करके किसी ने जो बनाई होगी और भी ग़म की घटा मुखड़े पे छाई होगी बिजली नजरों ने कई दिन ना गिराई होगी रंग चेहरे पे कई रोज़ ना आया होगा
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प
पद्मावति Mon, 09/14/2015 - 07:36 नवीन
गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा तौबा खुदा खैर करे खूब है करिश्मा खूब है करिश्मा, गोरे गोरे मुखड़े पे काला काला चश्मा पुढिल अक्षर म
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र
रातराणी Mon, 09/14/2015 - 07:48 नवीन
माई नि माई मुन्डेर पे तेरी बोल रहा है कागा जोगन हो गयी तेरी दुलारी मन जोगी संग लागा
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प
प्यारे१ Mon, 09/14/2015 - 07:53 नवीन
गोरी तेरा गाव बड़ा प्यारा चंद्रमा है आधा आधा जवाँ रे
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प
पद्मावति Mon, 09/14/2015 - 07:55 नवीन
ग़ज़ब का है दिन, सोचो ज़रा ये दीवानापन, देखो ज़रा तुम हो अकेले, हम भी अकेले मज़ा आ रहा है, क़सम से, क़सम से नेक्स्ट--' स'
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प
पद्मावति Mon, 09/14/2015 - 07:57 नवीन
अर्र, सॉरी, र पासून देते.
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प
प्यारे१ Mon, 09/14/2015 - 08:02 नवीन
तुम्ही एकट्या आहात का दोघी? 'पद्मा' व 'ती'? त्या ज्यो आणि ती ताईंनी सगळी गोची केली आहे. ;)
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↩ प्रतिसाद: पद्मावति
प
प्यारे१ Mon, 09/14/2015 - 07:59 नवीन
हम लिखा है ना ग से एक गाना. काहे दुई दुई गाने लिख रहे हो? स से गाना.... सामने ये कौन आआ दिल में हुई हलचल देखकर एक झलक हो गए सब पागल
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प
पद्मावति Mon, 09/14/2015 - 08:00 नवीन
रंग भरे बादल पे तेरे नैनो के काजल से मैने इस दिल पे लिख दिया तेरा नाम......चाँदनी, ओ मेरी चाँदनी. नेक्स्ट- न
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प
प्यारे१ Mon, 09/14/2015 - 08:03 नवीन
नजर के सामने जिगर के पास कोइ रहता है वो हो तुम म म म
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न
नीलमोहर Mon, 09/14/2015 - 08:03 नवीन
लागी तुमसे मन की लगन, लगन लागी तुमसे मन की लगन..
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प
प्यारे१ Mon, 09/14/2015 - 08:04 नवीन
बहोत कनफूजन हो रहा हय.
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न
नीलमोहर Mon, 09/14/2015 - 08:16 नवीन
प्रतिसाद लिहून प्रकाशित करेपर्यंत दुसरा प्रतिसाद येतोय त्यामुळे होतंय, असू द्या हो, येऊ द्या नेक्सट..
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म
मारवा Mon, 09/14/2015 - 08:21 नवीन
न तू ज़मीं के लिए है न आसमां के लिए तेरा वजूद है अब दास्ताँ के लिए पलट के सु-ए-चमन देखने से क्या होगा वो शाख ही ना रही जो थी आशियाँ के लिए ना तू ज़मीं... गरज परस्त जहां में वफ़ा तलाश न कर ये शय बनी थी किसी दूसरे जहां के लिए तेरा वजूद है अब दास्ताँ के लिए ए
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स
संजय पाटिल Mon, 09/14/2015 - 08:21 नवीन
ना ना करते प्यार तुम्हिसे कर बठे करना था इंकार मगर इकरार तुम्हिसे कर बैठे ठ
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म
मारवा Mon, 09/14/2015 - 08:27 नवीन
ठहरे हुए पानी मे कंकर ना मार सावरे मन मे हलचल सी मच जाएगी बावरे र
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म
माम्लेदारचा पन्खा Mon, 09/14/2015 - 08:39 नवीन
कुठलं हो हे गाणं ?
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↩ प्रतिसाद: मारवा
ज
ज्ञानोबाचे पैजार Mon, 09/14/2015 - 09:21 नवीन
हे दलाल या मिथुन दांच्या चित्रपटातले गाणे आहे. कुमार सानुने गायलेले आणि संगीत अर्थातच द वन अंड ओन्ली वन बाप्पीदांचे ऐकायला चांगले आहे. पण त्या "चढ गया उपर रे" मुळे हे कुठल्या कुठे वाहुन गेले. पैजारबुवा
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↩ प्रतिसाद: माम्लेदारचा पन्खा
म
माम्लेदारचा पन्खा Mon, 09/14/2015 - 09:34 नवीन
शब्दांवरून तर जुनं वाटतंय.... कुमार शानू, बप्पीदा आवडायचे पण काही काही गाण्यात !
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↩ प्रतिसाद: ज्ञानोबाचे पैजार
स
संजय पाटिल Mon, 09/14/2015 - 08:33 नवीन
रज्ज कि आयेगि बारात, रंगीलि होगी रात, मगन मै नचुंगी. ग
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स
संजय पाटिल Mon, 09/14/2015 - 08:35 नवीन
राजा कि आयेगी बारात, रंगीलि होगी रात, मगन मै नाचुंगी न
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↩ प्रतिसाद: संजय पाटिल
न
नीलमोहर Mon, 09/14/2015 - 08:34 नवीन
राह में उनसे मुलाकात हो गई जिससे डरते थे वही बात हो गई..
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स
संजय पाटिल Mon, 09/14/2015 - 08:36 नवीन
इस्पाडर मॅन इस्पाडर मॅन , तुने चुराया मेरे दिल क चैन
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प
प्यारे१ Mon, 09/14/2015 - 08:38 नवीन
ना जाओ सैय्या छुड़ा के बईया ग
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स
संजय पाटिल Mon, 09/14/2015 - 08:39 नवीन
ग कसं काय?
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↩ प्रतिसाद: प्यारे१
म
मारवा Mon, 09/14/2015 - 08:41 नवीन
बइय्या च्या शेवटी य येइल ना य
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↩ प्रतिसाद: संजय पाटिल
म
माम्लेदारचा पन्खा Mon, 09/14/2015 - 08:41 नवीन
अन पुढे चालू ठेवायचं... हा का ना का....
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↩ प्रतिसाद: संजय पाटिल
प
प्यारे१ Mon, 09/14/2015 - 08:42 नवीन
क्या यारो, ना जाओ सैय्या म्हणा मनातल्या मनात कसम तुम्हारी मैं रो पडूँगी रो पडूँगी म्हणले ना? आलं का ग?
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↩ प्रतिसाद: संजय पाटिल
स
संजय पाटिल Mon, 09/14/2015 - 08:41 नवीन
ना जाओ सैय्या छुड़ा के बईया, कसम तुम्हारी, मै रो पडुंगी.. रो पडुंगी. ग
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