चला अंताक्षरी खेळूया....
जुनाच पण सदाबहार खेळ !! इच्छुकांनी सहभागी व्हावे......
मेरे मेहबूब कयामत होगी....
आज रुसवा तेरी गलियोमे मोहब्बत होगी...
मे री न ज रे तो गि ला क र ती है....
तेरे दिल को भी सनम तुझसे शिकायत होगी....
पुढचे अक्षर "ग"....
💬 प्रतिसाद
(457)
न
नया है वह
Mon, 09/21/2015 - 12:41
नवीन
ना बोले तुम न मैने कुछ कहा
मगर न जाने ऐसा क्यों लगा
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प
प्यारे१
Mon, 09/21/2015 - 13:17
नवीन
लगन (अनंतवेळा म्हणून झाल्यावर) लग गई है, कैसी लगन लगी
ग
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न
नया है वह
Mon, 09/21/2015 - 13:29
नवीन
गोरी तेरी आखें कहे
रात भर सोयी नही
चदां देखे चुपके कही
और तारे जानते है सभी
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द
दुर्गविहारी
Mon, 09/21/2015 - 15:52
नवीन
भुला नही देना जी भुला नही देना
जमाना खराब हॅ जमाना खराब हॅ
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द
दिवाकर कुलकर्णी
Mon, 09/21/2015 - 18:07
नवीन
होले होले चलो मेरे साजना
हम भी पिछे है तुम्हारे, जरा होले होले चलो मेरे साजना------
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द
द-बाहुबली
Wed, 09/23/2015 - 14:30
नवीन
हा ४५६ वा प्रतिसाद म्हणजे.. समद्या मिपाकरांना मिळुन ४५६ युनीक गाणीही अजुन जमली नाहीतनाहीत... छ्या...
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अ
अनिरुद्ध प्रभू
Wed, 04/27/2016 - 19:44
नवीन
ना कजरे की धार, ना मोतियों के हार
ना कोई किया सिंगार, फिर भी कितनी सुंदर हो
मन में प्यार भरा, और तन में प्यार भरा
जीवन में प्यार भरा, तुम तो मेरे प्रियवर हो
ह घ्या.....
(अंताक्षरी प्रेमी)
अनिरुद्ध
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