कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
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| (नवमि)पाखरास...अर्थात दमामि म्हणे ! | दमामि | 108 | |
| तुझं प्रेम | ganeshpavale | 0 | |
| इतकाच अर्थ आता जगण्यास माणसाच्या | विशाल कुलकर्णी | 28 | |
| आई हिंदवी स्वराज्य स्थापू दे ! | ganeshpavale | 2 | |
| मैत्रीच्या थोडं पलीकडे.. प्रेमाच्या थोडं अलीकडे...! | Hrushikesh Marathe | 27 | |
| मित्रवेडा | विनीत संखे | 7 | |
| अनमोल ते सारे... | ganeshpavale | 2 | |
| पिंपळ | पथिक | 5 | |
| जंगल पूर्वीचे आज महानगर झाले | विवेकपटाईत | 0 | |
| आभाळाच्या मांडवाला भुई ची रे हाक | गणेशा | 2 | |
| 'लुच्चे दिन' आले : नागपुरी तडका | गंगाधर मुटे | 17 | |
| एक केवळ बाप तो | गंगाधर मुटे | 1 | |
| मॉडर्न अभंगवाणी | विनीत संखे | 12 | |
| ऐसा भूमीवरी कोणी नाही झाला | ganeshpavale | 0 | |
| शत, शत कोटि मुजरा करितो | ganeshpavale | 1 | |
| शिववंदना | ganeshpavale | 0 | |
| छावा | ganeshpavale | 0 | |
| वरूणराजाचे आगमन | यल्लप्पा सट्वजी कोकणे | 0 | |
| भोगदासी........ | एक एकटा एकटाच | 18 | |
| 'कविता' म्हणजे काय वेगळे | विदेश | 7 |