कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
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| नियतीचा खेळ (एकच चारोळी दोन पद्धतीने) | निमिष सोनार | 0 | |
| II मास्तर म्हणतात पोरांना , पिरेम लय वाईट II | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 12 | |
| एक अधिक एक... | अत्रुप्त आत्मा | 8 | |
| बाप हा ताप नसतो, पोरा | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 11 | |
| विठोबा | पिशी अबोली | 13 | |
| II मी प्रेमपुरीचा विठ्ठल II | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 0 | |
| ..तिथे ती भेटते | अनन्त्_यात्री | 2 | |
| II हात सोड कटेवरचे , उचल बडव्यांशी लढावया II | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 21 | |
| तुफान आलंया !! | फिझा | 0 | |
| II बळीराज किंकर अख्नंडीत माझे II | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 0 | |
| भेटी लागी जीवा . . | माम्लेदारचा पन्खा | 11 | |
| अन् फुलांचे देह ओले पेटवावे तू! | सत्यजित... | 2 | |
| उगवता सूर्य आणि तो | अनिकेत कवठेकर | 0 | |
| भूमिपुत्र आणि काळी आई | अनिकेत कवठेकर | 0 | |
| व्याकुळकथा | अनिकेत कवठेकर | 0 | |
| भरारी | अनिकेत कवठेकर | 0 | |
| अविनाशीत्व | अनिकेत कवठेकर | 0 | |
| टाळण्या कवटाळण्या वा पाळण्यायोग्य... | दमामि | 11 | |
| II ना होतो नवा मी , ना होती ती जुनी II ( मिपा मित्रानो "जेनी" नाही बरं का ... जुनी ) | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 0 | |
| कविता II आपुल्या नात्याचा शिलालेख कल्पला II | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 0 |