कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| ख्रिस्त | अरूण गंगाधर कोर्डे | 0 | |
| जिंदगी या बायकांची,राळ आहे का? | सत्यजित... | 10 | |
| मी.... | ओ | 0 | |
| प्रेमाचं गणित | अॅस्ट्रोनाट विनय | 5 | |
| धुंद पाऊस | चांदणशेला | 4 | |
| कोसला | संदीप-लेले | 3 | |
| काळाचे गीत | चांदणे संदीप | 4 | |
| जगायास कारण ईतकेच आहे... | सत्यजित... | 7 | |
| भटकत होतो | जव्हेरगंज | 1 | |
| जीवन एक अर्थ! | ज्योति अळवणी | 7 | |
| या गुलाबाच्या फुलाला... | सत्यजित... | 2 | |
| 'आयटी'तल्या मोरूची कवने | मूकवाचक | 21 | |
| मग्न तळ्याकाठी | अनन्त्_यात्री | 14 | |
| संध्याराणी | शार्दुल_हातोळकर | 24 | |
| कधी किनारा लिहितो,किंवा... | सत्यजित... | 20 | |
| दे बहाणे सोडुनी ... | संदीप-लेले | 17 | |
| चकवा | रामदास | 11 | |
| (ओंजळीने ती जरी झाकून घेते चेहरा...) | चतुरंग | 10 | |
| कंडोम | अविनाशकुलकर्णी | 16 | |
| जीत्याची खोड | संदीप-लेले | 5 |