कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| मध्यरात्री | अनन्त्_यात्री | 16 | |
| चेटकीण | ओ | 7 | |
| जीवात्मा | संदीप-लेले | 4 | |
| ( वरपरीक्षा ) | रातराणी | 14 | |
| वधूपरीक्षा | अविनाशकुलकर्णी | 0 | |
| अस्पृश्य | ओ | 6 | |
| निशीगंधाचे उखाणे | परशु सोंडगे | 0 | |
| निळाई ... | विशाल कुलकर्णी | 19 | |
| ?? नाव सुचले नाही ?? | इना | 0 | |
| वायाच एमबी चालली | फुंटी | 0 | |
| बोललो नाही कधी पण... | सत्यजित... | 4 | |
| 'नाते' म्हणून आहे! | सत्यजित... | 19 | |
| निघाला (गजल) | संदीप-लेले | 16 | |
| पुन्हा भोन्डला (भोन्डल्याची गाणी ) | मूखदूर्बळ | 1 | |
| छळ | संदीप-लेले | 2 | |
| इंद्रजाल | चांदणशेला | 1 | |
| राधा | शैलेन्द्र | 16 | |
| तो खुला बाजार होता! | सत्यजित... | 16 | |
| मन... जीवन... | ज्योति अळवणी | 0 | |
| पात्रामध्ये नदीच्या प्रेते सडूनी गेली ... | विशाल कुलकर्णी | 18 |