कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| गजलांकित प्रतिष्ठान | माहितगार | 0 | |
| प्रेम | पराग देशमुख | 0 | |
| १०० नंबरी प्रेम | अॅस्ट्रोनाट विनय | 14 | |
| माझी एक गोची होते | अनन्त्_यात्री | 16 | |
| तूच तू... | ज्योति अळवणी | 7 | |
| त्या आतल्या द्युतीला | अनन्त्_यात्री | 5 | |
| शांत अता या गाजा होणे नाही .. | drsunilahirrao | 6 | |
| बोल नुपूरांचे | चांदणशेला | 2 | |
| तुझ्या अंतरीची (चारोळी) | पराग देशमुख | 3 | |
| दु:ख अवघा धृवतारा मागते | drsunilahirrao | 12 | |
| शब्दच केवळ | अनन्त्_यात्री | 2 | |
| !!...'मानवी भूकंप'...!! | बटाटा चिवडा | 2 | |
| माणूस | विशाल कुलकर्णी | 5 | |
| नव गृहाचे कर्जही, फेडणे आता उभ्याने ! | संजय क्षीरसागर | 13 | |
| (वंचनांचे खर्चही पडताळणे आता नव्याने) | चतुरंग | 12 | |
| गन्धाल्पबलरागीयम् | Gandalf and the Balrog. | बॅटमॅन | 32 | |
| देवा तुला नक्की काय करायचं होतं ? | अभिषेक पांचाळ | 0 | |
| वंचनांचे खर्चही पडताळणे आता नव्याने | विशाल कुलकर्णी | 22 | |
| "पॅलेस ऑन व्हील्स " | पदकि | 0 | |
| प्रणय रात्र | अविनाशकुलकर्णी | 2 |