कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| प्रकाशवाट | ओ | 1 | |
| पेटुनी आरक्त संध्या... | सत्यजित... | 28 | |
| (ग़ज़ल - म्हटलेच होते) | चतुरंग | 4 | |
| चलच्चित्र | संदीप-लेले | 1 | |
| एक 'मळमळ-झल' | स्वामी संकेतानंद | 2 | |
| ----- | मितान | 25 | |
| नकळत | निनाव | 0 | |
| तो मी नव्हेच | अनन्त्_यात्री | 4 | |
| ग़ज़ल - म्हटलेच होते | वेल्लाभट | 18 | |
| शांत समय अन्... | Pradip kale | 6 | |
| तू नभीचा चंद्रमा हो... | सत्यजित... | 0 | |
| समांतर | ओ | 0 | |
| एकच अमृत घोट मिळावे | निनाव | 2 | |
| दृष्टीकोन | संदीप-लेले | 0 | |
| होऊन आज सूर्य (गझल) | शार्दुल_हातोळकर | 14 | |
| माझ्या कवितेची शाई | अनन्त्_यात्री | 9 | |
| शून्य.... | ओ | 0 | |
| किमया | संदीप-लेले | 0 | |
| तुझे रंग | परशु सोंडगे | 4 | |
| रंग | परशु सोंडगे | 2 |