कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| घे भरारी..मन म्हणाले... | सत्यजित... | 6 | |
| मिसळपाव | इरसाल कार्टं | 13 | |
| तिचे हासणे चांदण्याचा चुरा... | सत्यजित... | 22 | |
| मान | संदीप-लेले | 3 | |
| झेप | aanandinee | 1 | |
| चंद्र नको , तारे नको | अभिषेक पांचाळ | 10 | |
| आदिप्रश्न | अनन्त्_यात्री | 15 | |
| मंद थोडासा तुझा आभास किणकिणतो .. | drsunilahirrao | 17 | |
| अष्टावधानी | भटकीभिंगरी | 0 | |
| कवितेवरची कविता | चुकलामाकला | 13 | |
| पागोळ्या | निराकार गाढव | 9 | |
| विमान | संदीप-लेले | 6 | |
| बाळकडू | अॅस्ट्रोनाट विनय | 9 | |
| गैरसमज | संदीप-लेले | 4 | |
| मी ....अब्जशीर्ष | अनन्त्_यात्री | 0 | |
| मन | अमिता राउत | 0 | |
| राउळी या मनाच्या | वेल्लाभट | 38 | |
| ताळेबंद | रामदास | 10 | |
| अर्धा घाव | चांदणशेला | 0 | |
| कातरवेळी | चांदणशेला | 2 |