कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| एक कप तिचा.... | अत्रुप्त आत्मा | 18 | |
| आज तु आठवलीस... | Pradip kale | 0 | |
| शब्दतुला | विशाल कुलकर्णी | 6 | |
| शब्दतुला | विशाल कुलकर्णी | 0 | |
| शब्दतुला | विशाल कुलकर्णी | 0 | |
| नाही; माझा प्रॉब्लेमच आहे | वेल्लाभट | 21 | |
| आई | अक्षय दुधाळ | 3 | |
| नको तेवढे सत्य..... सत्यानाश ! | अरुण मनोहर | 2 | |
| दाही दिशांस जेंव्हा... | सत्यजित... | 4 | |
| त्या सुऱ्याची चालही लयदार आहे! | सत्यजित... | 9 | |
| रक्तरंग | संदीप-लेले | 6 | |
| हे फक्त माणसातच ! | शिव कन्या | 8 | |
| कविता | संदीप-लेले | 0 | |
| रिक्त प्याल्याच्या तळाशी... | सत्यजित... | 11 | |
| फुलपाखरु मनाचे हळुवार होत आहे! | सत्यजित... | 16 | |
| अडवाटेवरच देऊळ | ओ | 1 | |
| स्पेशल महापुरूष | परशु सोंडगे | 3 | |
| हळव्या खुणा | चांदणशेला | 0 | |
| " ळ " च्या करामती | ऋतु हिरवा | 4 | |
| एक बेवारस प्रेत - माझा बाप | परशु सोंडगे | 12 |