कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| जपुन टाक पाउल | Vinayak sable | 5 | |
| हळद | माधुरी विनायक | 5 | |
| अण्णारती- विरहखंड भाग १ | माम्लेदारचा पन्खा | 8 | |
| सांज मुकी | चांदणशेला | 3 | |
| सांगा | अरूण गंगाधर कोर्डे | 2 | |
| अध्यात्माची महती | अरूण गंगाधर कोर्डे | 12 | |
| " तू " | अरूण गंगाधर कोर्डे | 4 | |
| वादळ उगा निमाले.. | राघव | 8 | |
| अभिमन्यु तुझा | दिनु गवळी | 4 | |
| (दे कुटाणे सोडुनी...) | खेडूत | 10 | |
| ( ते पहा पब्लिक हसंल ) | माम्लेदारचा पन्खा | 8 | |
| (ती पहा पडली गझल) | वेल्लाभट | 7 | |
| (ती पहा पडली गझल) | सूड | 15 | |
| (ही पहा पाडली गजल) | ज्ञानोबाचे पैजार | 16 | |
| जरतारी | शिवोऽहम् | 6 | |
| ती पहा पडली गझल... | सत्यजित... | 11 | |
| शब्द. .. | अत्रुप्त आत्मा | 13 | |
| सर एक श्रावणाची बरसून काय गेली! | सत्यजित... | 18 | |
| माय | Dr prajakta joshi | 2 | |
| कसे या मनाला कसे जोजवावे? | सत्यजित... | 4 |