कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| आला पावसाळा आला पावसाळा | पाषाणभेद | 0 | |
| ही कविता फॉरवर्ड करा | vcdatrange | 4 | |
| या वेड्याला न कसला लोभ , ना कुणाचा राग | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 4 | |
| तुझा निरोप घेताना | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 0 | |
| उध्दु . . तुला माह्यावर भरोसा नाय काय ? | माम्लेदारचा पन्खा | 31 | |
| ती पण आता पुसट वाटू लागलीय | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 0 | |
| II शहराकडून "बा" चा फून आला II | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 0 | |
| दिंडी | अनन्त्_यात्री | 3 | |
| परीक्षा | माम्लेदारचा पन्खा | 3 | |
| विंडोसीट | फुंटी | 2 | |
| झाली...पहाट झाली! | सत्यजित... | 0 | |
| मला आजवर कधीच रडू आलं नाही निपचित पडलेल्या कलेवरांच | गरजू पाटिल. | 1 | |
| मराठी माणसा झोपलाच राहा | अरूण गंगाधर कोर्डे | 1 | |
| (ए, बैठ ना जरासा) | ज्ञानोबाचे पैजार | 8 | |
| II नऊची ती बस खास होती II | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 0 | |
| ये,बैस ना जराशी... | सत्यजित... | 28 | |
| भवताल | चंद्रकांत | 0 | |
| शिवस्तुती | अरूण गंगाधर कोर्डे | 2 | |
| II तो स्पर्शच नवा होता II | सिद्धेश्वर विलास पाटणकर | 0 | |
| आठवणींचा पाऊस | निमिष सोनार | 0 |