कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
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| सगळे बहाणे माफ आहेत प्रेमात !! [नवीन ] | प्रकाश१११ | 2 | |
| सगळे बहाणे माफ आहेत प्रेमात !! | प्रकाश१११ | 0 | |
| नसतेस घरी तू तेव्हा... "फणसाची फुले" ( विडंबन ) (Nasates Ghari Tu Tevha...) | बोलघेवडा | 10 | |
| बघ कशा संवेदना गातात माझ्या | मयुरेश साने | 6 | |
| जीव गुंतला ( चाल : खेळ मांडला ) | गणेशा | 4 | |
| माझिया केसानो!! | रमणरमा | 4 | |
| रक्षण | नगरीनिरंजन | 3 | |
| आई ... मिटलेला श्वास.. ९ | गणेशा | 2 | |
| परदेशी गेलेल्या मुलास ......./ | प्रकाश१११ | 6 | |
| परदेशी गेलेल्या मुलास ......./ | प्रकाश१११ | 0 | |
| मंद सुगंधी रात करीतसे घात- समस्यापुर्ती (३) | अरुण मनोहर | 41 | |
| प्रतिबिम्ब | मूकवाचक | 4 | |
| म्हातारा | प्रकाश घाटपांडे | 5 | |
| खाजकविता २ - दाढी , झुरळ आणि कविता... | कानडाऊ योगेशु | 10 | |
| आई ... मिटलेला श्वास.. ८ (मनपक्षी माखले सारे) | गणेशा | 3 | |
| अनंत शुभेच्छा !! | प्रकाश१११ | 2 | |
| तुला ना कळे लोचनांची कहाणी.. | राघव | 1 | |
| मुंबई | यकु | 16 | |
| चुंबिण्या येऊ नको तू............ | मयुरेश साने | 7 | |
| आरती भ्रष्टाचाराची - | विदेश | 0 |