कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| अंगाई | धनंजय | 9 | |
| तो कवी..ती कवियित्री.. | कानडाऊ योगेशु | 8 | |
| ५ : मी ..एक स्त्री | गणेशा | 4 | |
| जागरण गोंधळ : आई देवी अंबेचा जागर मी करीतो | पाषाणभेद | 5 | |
| चोरटा मुरारी - गौळण | गंगाधर मुटे | 11 | |
| इतिहास | स्पंदना | 18 | |
| नरकयात्रा | गणेशा | 6 | |
| शिखर त्यांनी गाठलेले - | विदेश | 2 | |
| ४ : वर्तुळ.. गती..परीघ.. | गणेशा | 2 | |
| धान्यापासून बनवा दारू ...!! | प्रकाश१११ | 2 | |
| एकास तीन | अवलिया | 13 | |
| चेंडू मारियेला | गंगाधर मुटे | 5 | |
| नदीवर धुणे धुणार्या बायका !! | प्रकाश१११ | 11 | |
| आपण सारे शिर्डीला जावूया | पाषाणभेद | 9 | |
| मास्तरांच्या छडीसारखे कठोर दिवस !!... | प्रकाश१११ | 7 | |
| वेणी सोडुनिया : गौळण | गंगाधर मुटे | 6 | |
| वृद्धाश्रमातील ते खिन्न डोळे !! | प्रकाश१११ | 10 | |
| तुला आपलेसे करावे किती ?... | मयुरेश साने | 4 | |
| माझ्या देशात राहणाऱ्या बाबास ..!! | प्रकाश१११ | 6 | |
| मरण्यात अर्थ नाही | गंगाधर मुटे | 10 |