कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| खरे काय नी खोटे काय ? | दत्ता काळे | 4 | |
| नभी उठतो बुलंद आवाज मराठीचा | गणेशा | 5 | |
| सोकावलेल्या अंधाराला इशारा | गंगाधर मुटे | 8 | |
| युगलगीतः आपला संसार सुखाचा करूया | पाषाणभेद | 1 | |
| सगळेच अवघड होऊन बसले आहे ...!! | प्रकाश१११ | 1 | |
| किशन बिहारी नुर....२ | अश्फाक | 11 | |
| Now we are only two :: टू वन्स आर टू :: बे एके बे | पाषाणभेद | 3 | |
| माझे खोलपण असेच उथळ उथळ | फ्रॅक्चर बंड्या | 4 | |
| कंटाळून गेलेय ...!!! | प्रकाश१११ | 4 | |
| किशन बिहारी नुर...१ | अश्फाक | 17 | |
| जगावेगळे विश्व कवीचे - | विदेश | 2 | |
| नूतन मराठीचा गौरव | युयुत्सु | 1 | |
| सावध व्हावे हे जनताजन | गंगाधर मुटे | 2 | |
| अंतर्धान अस्तित्व माझे ... | गणेशा | 1 | |
| प्रार्थना ...!! | प्रकाश१११ | 3 | |
| तुझी माझी प्रित होती | पाषाणभेद | 4 | |
| ती येणार आहे ...!! | प्रकाश१११ | 8 | |
| किम्म्त .. विचारांची .. | गणेशा | 5 | |
| जा जग !! .. (अध्यात्मिक कदाचीत) | गणेशा | 1 | |
| अग्नि.. | ज्ञानराम | 3 |