कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| शब्दांचे भरघोस पिक ..!! | प्रकाश१११ | 3 | |
| चल बाळा आपण पतंग घेवू | पाषाणभेद | 1 | |
| 'पाकनिष्ठ' कांदा, लुडबूडतो कशाला? | गंगाधर मुटे | 15 | |
| मस्त थंडी घट्ट बर्फाळलेली ..!! | प्रकाश१११ | 4 | |
| युगलगीतः नको नको नको नको नको | पाषाणभेद | 7 | |
| वाटले होते...! | यशोधरा | 19 | |
| ... | अभिषेक९ | 6 | |
| निष्पर्ण वृक्षावर पक्षी घरटी नाही बांधत !! | प्रकाश१११ | 4 | |
| बायको : नागपुरी तडका | गंगाधर मुटे | 19 | |
| नाही ... (गझल) | स्वानंद मारुलकर | 5 | |
| (कांदे पोहे) ... नीगेटीव्ह शेड | गणेशा | 3 | |
| नव्या वर्षाची हीच जिंगळ..... | विजुभाऊ | 5 | |
| भारी पडली जात | गंगाधर मुटे | 5 | |
| प्रच्छन्न प्रोमेथियसचे प्रमाथी प्राक्तन | शरदिनी | 42 | |
| रिटायर्ड माणसाला कोंबडी परवडत नाही'.....! | प्रकाश१११ | 7 | |
| किती वर्षाने असे निवांतपण ..!! | प्रकाश१११ | 4 | |
| (घट डोईवर घट कमरेवर) | मेघवेडा | 22 | |
| कर्तव्यनिष्ठ दधीचीचा कर्मदरिद्री अस्थिभंग | शरदिनी | 37 | |
| सांजवेळी सोबतीला.. | मयुरेश साने | 2 | |
| कांदे पोहे... | गणेशा | 7 |