कविता
| तारीख | लेखक | प्रतिसाद | |
|---|---|---|---|
| दैव आज हरवले! | स्वैर परी | 8 | |
| हे कवितेचे झाड....!! | प्रकाश१११ | 5 | |
| वाटंतं.... | झंम्प्या | 7 | |
| तेव्हाही तो पाऊस वेगळाच होता | माझीही शॅम्पेन | 4 | |
| माता ही घाबरी --- | विदेश | 9 | |
| जुने वाडे जमीनदोस्त ..!! | प्रकाश१११ | 3 | |
| अंतर्नाद | दत्ता काळे | 4 | |
| अन्तर्यात्रा | मूकवाचक | 9 | |
| कट्टी अलमट्टीशी | शरदिनी | 14 | |
| एक खिडकी , एक मुलगी | माझीही शॅम्पेन | 14 | |
| आजकाल कावळ्याचे खिडकीवर बसून ...!! | प्रकाश१११ | 5 | |
| कविता का सुचली ... | अभिषेक९ | 2 | |
| कसे दिवस मस्त होते ...!! | प्रकाश१११ | 4 | |
| पण...बंड करणार नाही... | अमोल देशमुख | 4 | |
| वॅलेंटाईन भेट प्रवास | गणेशा | 8 | |
| राख होऊन मेला : नागपुरी तडका | गंगाधर मुटे | 10 | |
| पुढार्या,तू मंञी होणार ! | विदेश | 2 | |
| माझा देश ..!! | प्रकाश१११ | 4 | |
| दु:ख आता फार झाले | गंगाधर मुटे | 5 | |
| तुझ्यासारखी माणसे | पेशवा | 3 |